घटना विवरण

राम और अयोध्या के राजकुमारों का जन्म

प्रकार: जन्मविश्वसनीयता: उच्च

दशरथ के यज्ञोत्तर अनुष्ठानों के बाद अयोध्या में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है।

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दशरथ के यज्ञोत्तर अनुष्ठानों के बाद अयोध्या में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। यह प्रसंग रामायण कथानक में एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है और इसके ऐतिहासिक-भौगोलिक संकेतों पर विभिन्न शोध परंपराओं में सतत अध्ययन होता रहा है।

विश्वसनीयता का आधार: इस घटना के लिए पाठीय स्रोतों में अच्छा सामंजस्य मिलता है और प्रमुख व्याख्याएँ मुख्य बिंदुओं पर व्यापक रूप से सहमत दिखती हैं।

वाल्मीकि रामायण श्लोक संदर्भ

  • Valmiki Ramayana Bala Kanda 1-18-9

    ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट् समत्ययुः। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु। ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह॥प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्। कौसल्याजनयद्रामं सर्वलक्षणसंयुतम्॥विष्णोरर्धं महाभागं पुत्रमैक्ष्वाकवर्धनम्। लोहिताक्षं महाबाहुं रक्तोष्ठं दुन्दुभिस्वनम्॥

    tato yajñe samāpte tu ṛtūnāṃ ṣaṭ samatyayuḥ | tataś ca dvādaśe māse caitre nāvamike tithau || nakṣatre'ditidaivatye svoccasaṃstheṣu pañcasu | graheṣu karkaṭe lagne vākpatāvindunā saha || prodyamāne jagannāthaṃ sarvalokanamaskṛtam | kausalyājanayadrāmaṃ sarvalakṣaṇasaṃyutam || viṣṇorardhaṃ mahābhāgaṃ putramaikṣvākavardhanam | lohitākṣaṃ mahābāhuṃ raktoṣṭhaṃ dundubhisvanam ||

    जब महाराज दशरथ द्वारा सम्पन्न किया गया वह महान यज्ञ पूर्णरूप से समाप्त हो गया, तब छः ऋतुएँ बीत गईं। इसके पश्चात् बारहवें मास में, पवित्र चैत्र मास की नवमी तिथि को, देवी अदिति के नक्षत्र — पुनर्वसु — में, जब आकाश में पाँच ग्रह अपनी-अपनी उच्च राशियों में स्थित थे, कर्क राशि लग्न में उदित थी, और वाणी के स्वामी बृहस्पति चन्द्रमा के साथ क्षितिज पर युक्त होकर उदय हो रहे थे — उस अत्यन्त शुभ और दिव्य बेला में, महारानी कौसल्या ने एक ऐसे पुत्र को जन्म दिया जो समस्त जगत् के स्वामी थे, सभी लोकों के प्राणियों द्वारा नमस्कृत थे, और शास्त्रों में वर्णित समस्त शुभ लक्षणों से परिपूर्ण थे। वह बालक साक्षात् भगवान विष्णु के अंश थे, अपार सौभाग्य और दिव्य तेज से सम्पन्न, और इक्ष्वाकु वंश की गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाने वाले पुत्र के रूप में इस धरा पर अवतरित हुए थे। उनके नेत्र रक्तिम आभा से दीप्त थे, भुजाएँ दीर्घ और महाबलशाली थीं, होंठ खिले हुए लाल कमल के समान थे, और उनके कण्ठ से निःसृत होने वाला स्वर दुंदुभी के गम्भीर नाद के समान था। उनका नाम था — राम।

    मूल स्रोत देखें

व्याख्याएँ

घटना विवरण में व्याख्याएँ और संबंधित स्रोत एक ही स्थान पर तुलना के लिए उपलब्ध होते हैं।

  • Text historical · Critical Edition Tradition (M.S. University Baroda)

    यह व्याख्या स्रोत-आधारित पाठ-पठन और तुलनात्मक कालक्रम विश्लेषण पर आधारित है।

    अनुमानित सीमा: -700 से 300
    विश्वसनीयता टिप्पणी: उच्च स्तर पर स्रोत-संगति उपलब्ध है।
  • Textual sequence · Valmiki Textual Tradition

    यह व्याख्या स्रोत-आधारित पाठ-पठन और तुलनात्मक कालक्रम विश्लेषण पर आधारित है।

    अनुमानित सीमा: -700 से -100
    विश्वसनीयता टिप्पणी: उच्च स्तर पर स्रोत-संगति उपलब्ध है।

स्रोत

  • वाल्मीकि रामायण, Bala Kanda, Sarga 18

    वाल्मीकि रामायण (अनुवाद पोर्टल) · 2009 · primary_text

    संदर्भ देखें
  • Allahabad High Court Ayodhya Bench Decision Archive (2010)

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय (eLegalix) · 2010 · legal_record

    संदर्भ देखें
  • अयोध्या निर्णय (विधिक अभिलेख)

    भारत का सर्वोच्च न्यायालय · 2019 · legal_record

    संदर्भ देखें
  • अयोध्या निर्णय (विधिक अभिलेख)

    भारत का सर्वोच्च न्यायालय (इंडियन कानून अभिलेख) · 2019 · legal_record

    संदर्भ देखें

संबंधित घटनाएँ

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    प्रकार: आमंत्रणविश्वसनीयता: मध्यम
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    प्रकार: राज्याभिषेकविश्वसनीयता: उच्च