घटना विवरण
जटायु का अंतिम प्रतिरोध और साक्ष्य
जटायु रावण को रोकने का प्रयास करता है और बाद में राम को निर्णायक सूचना देता है, जिससे दक्षिण दिशा का पीछा स्पष्ट होता है।
जटायु रावण को रोकने का प्रयास करता है और बाद में राम को निर्णायक सूचना देता है, जिससे दक्षिण दिशा का पीछा स्पष्ट होता है। यह प्रसंग रामायण कथानक में एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है और इसके ऐतिहासिक-भौगोलिक संकेतों पर विभिन्न शोध परंपराओं में सतत अध्ययन होता रहा है।
विश्वसनीयता का आधार: इस घटना के लिए पाठीय स्रोतों में अच्छा सामंजस्य मिलता है और प्रमुख व्याख्याएँ मुख्य बिंदुओं पर व्यापक रूप से सहमत दिखती हैं।
वाल्मीकि रामायण श्लोक संदर्भ
Valmiki Ramayana 3-68
रावणेन हृता सीता दिशं दक्षिणमास्थिता ।
rāvaṇena hṛtā sītā diśaṁ dakṣiṇam āsthitā |
Sita was carried away by Ravana toward the southern direction.
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व्याख्याएँ
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- Textual sequence · Valmiki Textual Tradition
यह व्याख्या स्रोत-आधारित पाठ-पठन और तुलनात्मक कालक्रम विश्लेषण पर आधारित है।
अनुमानित सीमा: -700 से -100विश्वसनीयता टिप्पणी: उच्च स्तर पर स्रोत-संगति उपलब्ध है।
स्रोत
वाल्मीकि रामायण, Aranya Kanda, Sarga 68
वाल्मीकि रामायण (अनुवाद पोर्टल) · 2009 · primary_text
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