घटना विवरण

श्रृंगवेरपुर में गुह द्वारा स्वागत

प्रकार: गठबंधनविश्वसनीयता: मध्यम

निषादराज गुह राम-लक्ष्मण-सीता का आदरपूर्वक स्वागत करते हैं और उनके गमन-पथ में सहयोग प्रदान करते हैं।

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निषादराज गुह राम-लक्ष्मण-सीता का आदरपूर्वक स्वागत करते हैं और उनके गमन-पथ में सहयोग प्रदान करते हैं। यह प्रसंग रामायण कथानक में एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है और इसके ऐतिहासिक-भौगोलिक संकेतों पर विभिन्न शोध परंपराओं में सतत अध्ययन होता रहा है।

विश्वसनीयता का आधार: इस घटना के स्रोत पर्याप्त हैं, पर कालक्रम, स्थान-निर्धारण या व्याख्या के कुछ बिंदुओं पर विभिन्न विद्वानों में मतभेद बने हुए हैं।

वाल्मीकि रामायण श्लोक संदर्भ

  • Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda 2-50

    श्लोक-संदर्भ: Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda 2-50

    śloka reference: Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda 2-50

    Primary chapter-level shloka reference for Guha Receives Rama at Shringaverapura.

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व्याख्याएँ

घटना विवरण में व्याख्याएँ और संबंधित स्रोत एक ही स्थान पर तुलना के लिए उपलब्ध होते हैं।

  • Textual sequence · Valmiki Textual Tradition

    Guha Receives Rama at Shringaverapura को कथानक निरंतरता और सापेक्ष-क्रम मानचित्रण के आधार पर रामायण: वनवास और अरण्य मार्ग क्रम में रखा गया है।

    अनुमानित सीमा: -700 से -100
    यह स्वतः-निर्मित व्याख्या घटना की विश्वसनीयता श्रेणी (मध्यम) के अनुरूप रखी गई है।

स्रोत

संबंधित घटनाएँ

ये संबंध स्पष्ट लिंक, साझा कथात्मक क्रम, भूगोल या घटना-प्रकार के आधार पर पारदर्शी रूप से दिखाए जाते हैं।

  • समान कथात्मक चाप

    भरत का राजगद्दी अस्वीकार

    भरत राज्याभिषेक अस्वीकार कर राम के अधिकार को स्वीकारते हैं, जिससे राजवंशीय वैधता और धर्मसंगत उत्तराधिकार सुरक्षित रहता है।

    प्रकार: उत्तराधिकारविश्वसनीयता: उच्च
  • समान कथात्मक चाप

    राम का वनवास

    राम चौदह वर्ष के वनवास के लिए प्राचीन भारत के अरण्य क्षेत्रों की ओर प्रस्थान करते हैं।

    प्रकार: वनवासविश्वसनीयता: उच्च
  • समान कथात्मक चाप

    कैकेयी द्वारा दो वरदानों की मांग

    कैकेयी पूर्व प्रदत्त वरदानों की मांग रखती हैं, जिससे उत्तराधिकार व्यवस्था बदलती है और वनवास का निर्णय आरंभ होता है।

    प्रकार: दरबारी राजनीतिविश्वसनीयता: उच्च
  • समान कथात्मक चाप

    गंगा नदी का पारगमन

    वनगमन के प्रारंभिक चरण में रामपक्ष गंगा पार कर दक्षिणमुखी मार्ग पर आगे बढ़ता है।

    प्रकार: यात्राविश्वसनीयता: मध्यम
  • समान प्रकार

    ऋष्यमूक में गठबंधन-संकल्प

    राम और सुग्रीव पारस्परिक सहयोग का संकल्प लेते हैं—सीता की खोज और सुग्रीव के राज्य-पुनर्स्थापन को एक साझा लक्ष्य बनाया जाता है।

    प्रकार: गठबंधनविश्वसनीयता: उच्च