घटना विवरण
गंगा नदी का पारगमन
वनगमन के प्रारंभिक चरण में रामपक्ष गंगा पार कर दक्षिणमुखी मार्ग पर आगे बढ़ता है।
Read Full Storyवनगमन के प्रारंभिक चरण में रामपक्ष गंगा पार कर दक्षिणमुखी मार्ग पर आगे बढ़ता है। यह प्रसंग रामायण कथानक में एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है और इसके ऐतिहासिक-भौगोलिक संकेतों पर विभिन्न शोध परंपराओं में सतत अध्ययन होता रहा है।
विश्वसनीयता का आधार: इस घटना के स्रोत पर्याप्त हैं, पर कालक्रम, स्थान-निर्धारण या व्याख्या के कुछ बिंदुओं पर विभिन्न विद्वानों में मतभेद बने हुए हैं।
वाल्मीकि रामायण श्लोक संदर्भ
Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda 2-52
श्लोक-संदर्भ: Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda 2-52
śloka reference: Valmiki Ramayana Ayodhya Kanda 2-52
Primary chapter-level shloka reference for Crossing of the Ganga.
मूल स्रोत देखें
व्याख्याएँ
घटना विवरण में व्याख्याएँ और संबंधित स्रोत एक ही स्थान पर तुलना के लिए उपलब्ध होते हैं।
- Textual sequence · Valmiki Textual Tradition
Crossing of the Ganga को कथानक निरंतरता और सापेक्ष-क्रम मानचित्रण के आधार पर रामायण: वनवास और अरण्य मार्ग क्रम में रखा गया है।
अनुमानित सीमा: -700 से -100यह स्वतः-निर्मित व्याख्या घटना की विश्वसनीयता श्रेणी (मध्यम) के अनुरूप रखी गई है।
स्रोत
Valmiki Ramayana Primary Index
Sanskrit Documents · 2026 · primary_text
संदर्भ देखें
संबंधित घटनाएँ
ये संबंध स्पष्ट लिंक, साझा कथात्मक क्रम, भूगोल या घटना-प्रकार के आधार पर पारदर्शी रूप से दिखाए जाते हैं।
समान कथात्मक चाप
राम का वनवास
राम चौदह वर्ष के वनवास के लिए प्राचीन भारत के अरण्य क्षेत्रों की ओर प्रस्थान करते हैं।
प्रकार: वनवासविश्वसनीयता: उच्चसमान कथात्मक चाप
भरद्वाज आश्रम का दर्शन
भरद्वाज ऋषि के आश्रम में राम मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं, जिसके बाद चित्रकूट को निवास क्षेत्र के रूप में चुना जाता है।
प्रकार: मार्गदर्शनविश्वसनीयता: मध्यमसमान कथात्मक चाप
श्रृंगवेरपुर में गुह द्वारा स्वागत
निषादराज गुह राम-लक्ष्मण-सीता का आदरपूर्वक स्वागत करते हैं और उनके गमन-पथ में सहयोग प्रदान करते हैं।
प्रकार: गठबंधनविश्वसनीयता: मध्यमसमान कथात्मक चाप
चित्रकूट में निवास स्थापना
वनवास के आरंभिक काल में राम चित्रकूट क्षेत्र में एक स्थायी आश्रय स्थापित करते हैं।
प्रकार: निवास स्थापनाविश्वसनीयता: मध्यम